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Uttar Pradesh State
Rural Livelihood Mission


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FAQ’s for Fisheries (Aquaculture)

FAQ's for Fisheries (Aquaculture)

    • कम लागत में अधिक उत्पादन
    • तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण
    • सुनिश्चित बाजार एवं BUYBACK सुविधा
    • महिलाओं की आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता

  • एक टैंक से अच्छे प्रबंधन से लगभग ₹30,000 से ₹35,000 की आय एक चक्र

    ]में प्राप्त हो सकती है।

    • स्थानीय बाजार
    • होटल/रेस्टोरेंट
    • FPO के माध्यम से
    • परियोजना के अंतर्गत BUYBACK सुविधा भी उपलब्ध है

  • सामन्यतः सिंघी मछली 6-8 माह में 80–100 ग्राम वजन प्राप्त कर लेती है।
    80-100 ग्राम वजन की सिंघी मछली का बाजार में अच्छा मूल्य मिल जाता है 

  • हाँ, यदि टैंक का प्रबंधन सही से न किया जाय तो बीमारी होने की सम्भावना बनी रहती है। समय पर निगरानी, संतुलित आहार और तकनीकी सलाह से रोगों से बचाव संभव है।

  • हाँ, टैंक में जल का तापमान, घुलित ऑक्सीजन, पी०एच०, अमोनिया और टी०डी०एस० की नियमित जाँच किया जाना अत्यंत आवश्यक है। जिससे टैंक में जलीय गुणवत्ता नियंत्रण संतुलित रखा जा सके। 

  • मार्च–अप्रैल का समय सिंघी बीज संचयन के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

    • सिंघी मछली को उसके शरीर के वजन का 4–5% आहार देना चाहिए।
    • दिन में 2 बार (सुबह जल्दी और शाम को)।
    • फ्लोटिंग एवं उच्च प्रोटीन युक्त आहार देना चाहिए।

  • 15,000 लीटर टैंक में औसतन 4,000 सिंघी बीज डाले जाते हैं।

  • तकनीकी सहायता इकाई/वेंडर द्वारा महिलाओं को बीज एवं आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

  • सिंघी वायु-श्वासी मछली है, जो कम ऑक्सीजन, अधिक TDS और सीमित पानी में भी जीवित रह सकती है। इसका बाजार मूल्य भी अधिक होता है।

  • सिंघी, देशी मांगुर, तिलापिया एवं पाबदा जैसी प्रजातियाँ बायोफ्लॉक के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

  • इस परियोजना के अंतर्गत उत्पादक समूह की महिलाओं को निःशुल्क 3 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है।

  • इस तकनीक में मछलियों का अपशिष्ट और बचा हुआ आहार लाभकारी बैक्टीरिया की सहायता से फ्लॉक में बदल जाता है, जिसे मछलियाँ पुनः खा लेती हैं। इससे आहार लागत कम होती है और पानी की गुणवत्ता बनी रहती है।

  • 15,000 लीटर क्षमता के टैंक के लिए लगभग 200 वर्ग फीट उचित समतल भूमि की आवश्यकता होती है (स्थल चयन में स्थानीय तकनीकी टीम द्वारा मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है) ।

  • PMMSY योजना से जुड़ने हेतु कोई भी आवेदन शुल्क नहीं लगता है आवेदन पूर्णतः निःशुल्क है।

  • PMMSY से जुड़ने हेतु निम्नलिखित दस्तावेज़ की आवश्यकता होती है

    • आधार कार्ड
    • निजी भूमि के दस्तावेज़ / लीज / सहमति पत्र
    • स्व-हस्ताक्षरित शपथ पत्र
    • बैंक पासबुक
    • पासपोर्ट साइज फोटो

  • हाँ, ऋण से सम्बंधित जानकारी के लिए अपने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन या संकुल स्तरीय संगठन से संपर्क किया जा सकता है।

  • नहीं, अनुदान राशि केवल DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में दी जाएगी।

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से अनुदान प्राप्त करने के बाद परियोजना को न्यूनतम 7 वर्षों तक संचालित करना अनिवार्य है।

  • नहीं, सहायता/अनुदान राशि वापस नहीं करनी होती, लेकिन योजना का निर्धारित अवधि तक सफल संचालन आवश्यक है।

  • इस परियोजना से जुडी समूह की महिलाओं को मत्स्य विभाग के प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत ₹30,000 की अनुदान राशि DBT के माध्यम से सीधे महिलाओं के बैंक खाते में प्रदान दिए जाने का प्रावधान है।

  • इस परियोजना में 15,000 लीटर क्षमता का तारपोलिन बायोफ्लॉक टैंक घर के पास बनाया जाता है।

  • मत्स्य उत्पादक समूह ग्राम स्तर पर गठित कम से कम 10 महिलाओं का एक व्यावसायिक समूह होता है, जो सामूहिक रूप से मत्स्य पालन का कार्य करता है।

    • इस परियोजना से जुड़ने हेतु मत्स्य उत्पादक समूह की सदस्यता लेना अनिवार्य है।
    • ₹50 पंजीकरण शुल्क देकर स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ मत्स्य उत्पादक समूह की सदस्य बन सकती हैं।

  • यह परियोजना वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 10 जनपदों में संचालित है:
    बाराबंकी, सुल्तानपुर, बहराइच, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, संतकबीरनगर, बाँदा, फतेहपुर एवं महोबा।

    • समूह की महिलाओं को मत्स्य पालन के माध्यम से अतिरिक्त एवं सतत आजीविका उपलब्ध कराना।
    • सामुदायिक स्तर पर मत्स्य उत्पादक समूहों का गठन करना।
    • समूह से जुडी महिलाओं एवं उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना।
    • पोषण स्तर में सुधार करना।
    • उत्तर प्रदेश में मछली उत्पादन को बढ़ावा देना।

  • उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत मत्स्य परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ बायोफ्लॉक पद्धति से सिंघी मछली पालन का कार्य किया जा रहा। इस परियोजना से जुडी समूह की महिलाओं को मस्त्य विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना से अनुदान राशि का भी प्रावधान  है।

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Last Updated: 20 May 2025